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रस गुंजन / Rasa Gunjan

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बिरजू महाराज न सिर्फ कथक के बल्कि समूचे भारतीय शास्त्रीय नृत्य-जगत में एक कालजयी मूर्धन्य माने जाते है। कथक के तो वे हमारे समय में पर्याय ही हो गए है। कथक पर उनका गहरा और दूरगामी प्रभाव पड़ा है और उनके बाद कथक वह नहीं रहा जो पहले था।
इस संचयन में उन्होंने अपने लखनऊ घराने में कथक के साथ प्रयोग की जाने वाली ठुमारियों और बंदिशों को शब्धबद्ध कर उनका भावार्थ और एक तरह से नृत्यांकन किया है। ऐतिहासिक दस्तावेज होने के साथ- साथ यह कथक प्रदर्शन और प्रशिक्षण में एक उपयोगी संहिता के रूप मे काम में लिया जा सकता है। अशोक वाजपेयी

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Additional information

Author

Birju Maharaj

Binding

Hard bound

ISBN

9788171856800

Language

Hindi

Publication

Popular Prakashan Pvt. Ltd.

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